अधिवक्ता रजत कादयान एवं सहयोगी · गुरुग्राम

गुरुग्राम में महिलाओं के विरुद्ध अपराध के अधिवक्ता के रूप में हम ऐसे मामलों में किसी भी पक्ष की ओर से पैरवी करते हैं, लेकिन एक ही विवाद में कभी दोनों पक्षों की ओर से नहीं।

संरक्षण चाहने वाली महिला के लिए

  • घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम, 2005 के अंतर्गत आवेदन — संरक्षण, निवास, आर्थिक राहत और अभिरक्षा (कस्टडी) के आदेश
  • धारा 85 BNS (पूर्व में धारा 498A IPC) के अंतर्गत शिकायतें
  • धारा 144 BNSS तथा व्यक्तिगत कानून के अंतर्गत भरण-पोषण
  • पीछा करना और उत्पीड़न, ऑनलाइन उत्पीड़न सहित — देखें साइबर अपराध
  • POSH अधिनियम, 2013 के अंतर्गत आंतरिक समिति के समक्ष कार्यस्थल उत्पीड़न के मामले

धारा 85 की एफ़आईआर का सामना कर रहे परिवार के लिए

धारा 85 की एफ़आईआर में अक्सर माता-पिता, भाई-बहनों और ऐसे रिश्तेदारों के नाम भी डाल दिए जाते हैं जो दूसरे शहरों में रहते हैं। सर्वोच्च न्यायालय ने ठीक इसी प्रवृत्ति के विरुद्ध चेतावनी दी है। हमारा पहला कदम सामान्यतः सभी नामजद व्यक्तियों के लिए अग्रिम ज़मानत होता है, और उसके बाद यह जाँच कि प्रत्येक व्यक्ति पर वास्तव में क्या आरोप है। जहाँ आरोप सामान्य और अस्पष्ट हों, वहाँ उन रिश्तेदारों के संबंध में एफ़आईआर रद्द (क्वैशिंग) कराना अक्सर संभव होता है।

समझौता

इनमें से कई मामले तलाक़ के साथ-साथ चलते हैं और उसी के साथ सुलझ जाते हैं। जहाँ यही समझदारी भरा रास्ता हो, वहाँ हम दो साल के मुक़दमे के बाद नहीं, बल्कि शुरुआत में ही यह बता देते हैं।

तत्काल ख़तरे में 112 पर कॉल करें। महिला हेल्पलाइन 181।

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एफ़आईआर के बाद हर घंटा मायने रखता है।

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