हरियाणा में इन धाराओं के अंतर्गत दर्ज अधिकांश एफ़आईआर वैसी नहीं होतीं जैसा शीर्षक से लगता है। ये तब दर्ज होती हैं जब कोई बालिग़ जोड़ा परिवार की इच्छा के विरुद्ध घर छोड़ देता है और लड़की का परिवार अपहरण का मामला दर्ज करा देता है। गुरुग्राम में अपहरण और व्यपहरण के मामलों के अधिवक्ता के रूप में हम यह स्थिति अक्सर देखते हैं, और इसे सभी संबंधित लोगों के प्रति संवेदनशीलता के साथ संभालते हैं।
घर छोड़कर जाने (एलोपमेंट) की एफ़आईआर
जहाँ महिला बालिग़ है और अपनी इच्छा से गई है, वहाँ कोई अपहरण नहीं है। इस आशय का उसका बयान, यदि विधिवत दर्ज हो जाए, तो सामान्यतः मामला वहीं समाप्त हो जाता है। ज़रूरी यह है कि वहाँ तक सुरक्षित पहुँचा जाए, और इसके लिए हम ये कार्य करते हैं:
- परिवार से वास्तविक ख़तरा होने पर उच्च न्यायालय के समक्ष संरक्षण याचिका
- लड़के और एफ़आईआर में नामजद अन्य लोगों के लिए अग्रिम ज़मानत
- यह सुनिश्चित करना कि उसका बयान बिना दबाव के दर्ज हो, और आयु के प्रमाण सुरक्षित रखना
- स्थिति रिकॉर्ड पर आ जाने के बाद एफ़आईआर रद्द कराना
जहाँ व्यक्ति नाबालिग़ है
वैधानिक आयु से कम होने पर सहमति का कोई महत्व नहीं रहता और स्थिति पूरी तरह बदल जाती है, अक्सर पॉक्सो के साथ। आयु दावे से नहीं, दस्तावेज़ों से सिद्ध करनी होती है, और हम इसे उतना ही विवादित मुद्दा मानते हैं जितना यह अक्सर होता है।
वास्तविक अपहरण और फिरौती के मामले
हम धारा 140 और 141 के मामले भी देखते हैं, जहाँ फ़ाइल कॉल रिकॉर्ड, लोकेशन डेटा और बरामदगी साक्ष्यों से बनती है — और इनमें से हर एक की जाँच की जा सकती है। हम सबकी जाँच करते हैं।
निःशुल्क प्रथम परामर्श के लिए किसी भी समय +91 82954 13475 पर कॉल करें, या अपने मामले का विवरण भेजें।