अधिवक्ता रजत कादयान एवं सहयोगी · गुरुग्राम

"कोर्ट मैरिज" दो अलग-अलग चीज़ों को कहा जाता है, और दोनों की प्रक्रिया अलग है। गुरुग्राम में विवाह पंजीकरण और कोर्ट मैरिज के अधिवक्ता के रूप में हम जोड़ों को उस प्रक्रिया में मार्गदर्शन देते हैं जो उन पर लागू होती है।

पहले से संपन्न विवाह का पंजीकरण

हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 के अंतर्गत, जहाँ विवाह संस्कार हो चुका है। प्रमाणपत्र उस क्षेत्र के रजिस्ट्रार द्वारा जारी किया जाता है जहाँ विवाह हुआ या जहाँ कोई एक पक्ष रहता है। सामान्यतः आवश्यक:

  • दोनों पक्षों की आयु और पहचान का प्रमाण
  • निवास का प्रमाण
  • विवाह की तस्वीरें और निमंत्रण पत्र
  • विवाह में उपस्थित गवाह

विशेष विवाह अधिनियम के अंतर्गत विवाह

अंतर-धार्मिक जोड़ों के लिए, और किसी भी ऐसे व्यक्ति के लिए जो सिविल विवाह चाहता है। हम विवाह अधिकारी के पास नोटिस दाख़िल करते हैं, जो तीस दिनों तक प्रदर्शित रहता है; यदि कोई वैध आपत्ति नहीं आती, तो विवाह संपन्न और पंजीकृत किया जाता है। प्रतीक्षा अवधि वैधानिक है और इसे कम नहीं किया जा सकता।

संरक्षण याचिकाएँ

जहाँ किसी जोड़े को किसी भी परिवार से वास्तविक ख़तरा हो, वहाँ हम पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के समक्ष संरक्षण याचिका दायर करते हैं। दो बालिग़ व्यक्तियों को विवाह करने का अधिकार है, और राज्य उनकी रक्षा करने के लिए बाध्य है। हम अक्सर इसे विवाह के साथ ही दायर करते हैं, और यह अपहरण की एफ़आईआर दर्ज होने से पहले करना बेहतर है, बाद में नहीं — देखें अपहरण और व्यपहरण।

यदि बाद में विवाह विच्छेद की आवश्यकता हो

यही पंजीकरण दस्तावेज़ बाद में तलाक़ या आपसी सहमति से अलगाव के लिए भी सामान्यतः शुरुआती आधार होते हैं, इसलिए विवाह चाहे जैसे भी हुआ हो, प्रमाणपत्र और गवाहों का विवरण सुरक्षित रखना उचित है।

निःशुल्क प्रथम परामर्श के लिए किसी भी समय +91 82954 13475 पर कॉल करें, या अपने मामले का विवरण भेजें।

कॉल करें +91 82954 13475 निःशुल्क मामला समीक्षा

निःशुल्क परामर्श · 24×7

एफ़आईआर के बाद हर घंटा मायने रखता है।

कॉल व्हाट्सऐप निःशुल्क समीक्षा